दिल्ली:अनुराग्यम् द्वारा डॉ रुचि चतुर्वेदी जी का जन्मोत्सव धूम धाम से मनाया गया .

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अनुराग्यम् द्वारा डॉ रुचि चतुर्वेदी जी का जन्मोत्सव धूम धाम से मनाया गया .

संजय कुमार गिरि (नई दिल्ली)

कला, साहित्य, विज्ञान, सामाजिक सरोकार और संस्कृति के मंच अनुराग्यम् , नई दिल्ली ने सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ रुचि चतुर्वेदी का जन्मोत्सव आगरा में ३ जनवरी २०२१ की शाम को बहुत ही धूम-धाम से मनाया साथ ही में अनुराग्यम् से जुड़े कवियों एवं कवयित्रियों की गूंज से शाम महक उठी, जिसको टेन न्यूज़ ने अपने पटल पर लाइव प्रसारित किया.एक ऐसी शाम गुज़री कविताओं के साथ जो कि डॉ रुचि चतुर्वेदी को पूर्ण रूप से समर्पित थी, ओर गौरतलब है कि रुचि जी इस कार्यक्रम तो क्या इसकी रूपरेखा से भी सर्वथा अनभिज्ञ थीं.इस आनंददायक अवसर ने आदरणीया डॉ रुचि चतुर्वेदी जी को इतना भावुक कर दिया जो लिखकर नहीं बताया जा सकता है.अनुराग्यम् की कैप्लेट मासिक पत्रिका विरासत द्वितीय अंक का अनावरण सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ रुचि चतुर्वेदी द्वारा किया गया बताते चलें कि विरासत पत्रिका का द्वितीय अंक विशेष रूप से डॉ रुचि जी को समर्पित है.

कार्यक्रम का संचालन अनुराग्यम् की महासचिव आकाँक्षा शर्मा जी एवं संस्कृति विभाग अध्यक्ष कवि कुमार आदित्य जी के द्वारा किया गया जिन्होंने बड़ी सहजता से डॉ रुचि चतुर्वेदी जी का अभिनंदन अपने श्रेष्ठ मुक्तक, छंद, कविताओं से किया.इस अविस्मरणीय शाम के पात्र बने अनुराग्यम् के संस्थापक सचिन चतुर्वेदी जी, जिनकी अनुराग्यम् को आरम्भ करने की ये अनूठी पहल वास्तव में सराहनीय है .कला,साहित्य, विज्ञान से जुड़े तमामतर बड़े ख्यातिलब्ध नाम कवि-कवयित्रियाँ मित्रगण,अग्रज-अनुज कार्यक्रम में सम्मिलित थे, विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, रुचि जी के पति देव श्री रजनीश तिवारी जो स्वयं सौम्यता की प्रतिमूर्ति है, और प्रेमस्वरूपा वात्सल्य की मूर्ति उनकी माता जी, चुबू और मनु व परिवार के अन्य सदस्य, सभी ने बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ प्रेम पूर्वक स्नेहयुक्त बधाइयाँ प्रेषित की. कवयित्री मनीषा यादव, मशहूर कवि एवं फोटोग्राफर जगदीश मीना, कवि ज्ञानेन्द्र शुक्ल वत्सल, कवि गोपाल गुप्ता, कवि, पत्रकार एवं स्केच आर्टिस्ट संजय कुमार गिरि , प्रिंसेस श्वेता, सौरभ, कवि अंगद धारिया सभी ने मिलकर इस शाम को आनंद और हर्ष से परिपूर्ण कर दिया .

हमेशा की तरह मशहूर चित्रकार संजय गिरि ने डॉ रुचि चतुर्वेदी जी का शानदार पेंसिल स्कैच उन्हें भेंट किया.चित्रकार संजय अब तक 188 साहित्यकारों के स्केच बना चुके हैं.

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