बिहार के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में मचा हुआ है राजनीतिक हड़कंप

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🔳 बिहार के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में मचा हुआ है राजनीतिक हड़कंप

 ⚫जयकृष्ण कुमार(बिहार)

  1. 🔲 बिहार के भागलपुर जिला अंतर्गत आता है गोपालपुर विधानसभा और यहां के विधायक हैं गोपाल मंडल । गंगोता समाज से आने वाले गोपाल मंडल को जातीय बहुलता का सदैव लाभ मिला है और 2020 के विधानसभा चुनाव में चौथी बार विधायक चुने गए हैं । किसी भी राजनेता के लिए चौथी बार विधायक या जनप्रतिनिधि चुना जाना गौरव की बात हो सकती है, परंतु विधायक गोपाल मंडल अपने उटपटांग बोल और दबंगई स्वभाव या गुंडागर्दी के लिए जाने जाते हैं। वे विधि विधान से ऊपर उठकर लाठी-डंडों और हथियारों से अपने सम्मान की बात करते हैं ।
    कुछ वर्ष पूर्व हाउसिंग बोर्ड भागलपुर में सरकारी जमीन पर गौशाला और बासा बनाकर हड़पने की कोशिश करने की वजह से सुर्खियों में आए तो 2020 में तिलकामांझी में एक जमीन मालिक को डराने धमकाने और थप्पड़ मारने की वजह से सुर्खियों में रहे एक पुल निर्माण कंपनी से उगाही करने में चर्चा में आए, और ना जाने कितने काले कारनामों से अखबारों के पन्ने रंगते गए पर इनकी रंगत और स्वभाव में कोई फर्क नहीं आया ।विधानसभा चुनाव 2020 के बाद पुनः विधायक बनने के बाद तो मानो उनके बचे खुचे शर्म भी हवा हो गए हैं । अपने ही गठबंधन एनडीए के भागलपुर से भाजपा प्रत्याशी रहे रोहित पांडे पर गोपाल मंडल ने कई निजी टिप्पणी कर डाली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कह दिया तो रोहित पांडे जीत गए । वैसा कहीं ब्राह्मण होता है ? नाटा, काला , मुंह में बोल नहीं , लंबी टीक, कोई कमान नहीं……. चाहिए एमएलए,एमपी बनने के लिए दबंग । मसल सोना चाहिए ना ।
    इस प्रकार की गैर जिम्मेदाराना और और असम्मानजनक टिप्पणी समाज में विद्वेष फैलाने का काम करता है। हालांकि रोहित पांडे ने सरलता से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं तो वैसे टीक रखता भी नहीं हूं । मैंने तो गोपाल मंडल को कई बार नमस्ते भी किया, पता नहीं बे मुझे पहचानते भी हैं या नहीं । मैं तो वैसी पार्टी में नहीं हूं जहां मसल्स की जरूरत हो । मैं तो आम जनता की भाषा में बात करता हूं , उनके साथ घुलमिल कर रहता हूं । विरोधियों द्वारा ज्यादा तूल नहीं दिए जाने की वजह से यह मामला ठंडा पड़ा ही था कि बिहपुर के नवनिर्वाचित विधायक शैलेंद्र को किए गए फोन का ऑडियो वायरल होने से नवगछिया भाजपा कार्यालय समेत अन्य पार्टी कार्यालय में भूचाल मच गया क्योंकि इस बार के बिगड़े बोल में श्री मंडल ने ना सिर्फ श्री शैलेंद्र को धौंस दिखाया बल्कि हिदायत और चेतावनी भी दी कि उनकी बात मान लीजिए नहीं तो अगली बार आप जीत नहीं पाएंगे , साथ ही भूमिहार और बनिया को लाठी – डंडो से सैतने की बात भी कही। बात यहां भी थम जाती तो शायद तुल ना पकड़ती पर उन्होंने अपने अहंकार के मद में यह भी घोषणा कर दी कि अखिलेश यादव अभी जिंदा है जमीन मालिकों के खेत में जबरन बुवाई करवा देंगे । इसी धुन में उन्होंने पूर्व सांसद अनिल यादव समेत कई लोगों पर कीचड़ उछाला । ई शैलेंद्र ने बड़बोलेपन को गोपाल मंडल की आदत बताते हुए गंभीरता से नहीं लेने की बात कही परंतु मरवा व सैदपुर समेत कई स्थानों पर विधायक का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया गया । भूमिहार ,बनिया समेत यादव जाति के लोग भी अपनी जातीय प्रतिष्ठा धूमिल किए जाने के विरोध में खड़े हो गए । इसी राजनीतिक गहमागहमी के बीच 7 जनवरी को विधायक ने एक नया बयान देकर बखेड़ा खड़ा कर दिया कि नीतीश कुमार मात्र छः माह के लिए मुख्यमंत्री हैं इसके बाद तेजस्वी सरकार आएगी । मतलब स्पष्ट था कि इससे यह संदेश गया कि जेडीयू पुनः राजद के साथ जाएगी । इस बयान के बाद तो नवगछिया और गोपालपुर मानो बिहार की राजनीति का ध्रुव बन गया। परंतु रात बीती ही थी कि 8 जनवरी को वे मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए तेजस्वी सरकार वाले बयान से पलटी मार गए। उन्होंने अपनी ही बात का खंडन करते हुए कहा कि मैं नीतीश का सिपाही हूं और आखिरी सांस तक नीतीश कुमार के साथ हूं । उन्होंने मीडिया पर आरोप मढ़ते हुए कहा कि मीडिया ने उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया है । हालांकि कुछ रजनीतिक जानकार ये भी बात कर रहे हैं कि यह जदयू और नीतीश कुमार की सोची समझी साजिश है । ऐसे बयानों से जेडीयू बीजेपी के साथ माइंड गेम खेल रही है , हालांकि मैं इससे इत्तेफ़ाक नहीं रखता ।
    मेरा मानना है कि गोपाल मंडल दबंग प्रवृत्ति के होने के कारण कुछ भी बोलने से गुरेज नहीं करते । बाद में बात बिगड़ते देख घुड़की मारते भी देर नहीं लगाते ऐसा उन्होंने ई शैलेंद्र के ऑडियो वायरल होने पर भी कहा कि वे तो मित्रवत, भाईचारे के साथ बात कर रहे थे। उन्हें क्या पता था कि वे इसे वायरल कर देंगे । नाच और आर्केस्ट्रा में भी नर्तकियों संग ठुमके लगाने के उनके कई वीडियो वायरल हो चुके हैं । हर बार थोड़ी बहुत चर्चा के बाद सारी बातें दब जाती है, परंतु ऐसे गैर जिम्मेदाराना व्यवहार और बयानबाजियां सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहा है ।जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें अपने बयानों और व्यवहारों पर संयम रखना चाहिए ।

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