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📝कविता 

बच्चो के ऊपर बड़ा बोझा न लादिए

बच्चो के बोझा इतना भी न लादो
की आत्महत्या करने को सोचने लगे ।
सरदर्दी बेचैनी इतनी न दीजिए
कि गुस्से में कुछ भी वो भौंकने लगें ।।

मां हो तुम बाप हो
तो जिम्मा ये लीजिए ।
नाबालिग को बड़े बड़े
काम मत दीजिए ।।

जागरूक बनकर कानून पालन कीजिए ।
नियमों का इस तरह न उल्लंघन कीजिए ।।
आदमी हो संविधान मान लो ।
क्या करें क्या न करें ये जान लो ।।

बालकों को प्रेम दो
उत्साह उछाह दो ।
उम्र देखते हुए
जो उचित हो राह दो ।।

सुनो जीतेन्द्र कह रहा मेरी बात मानिए ।
भूत वर्तमान और भविष्य जानिए ।।
कक्षा तीन में जो पढ़ रहा विद्यार्थी ।
कक्षा दस का झोला उसके पीठ में न टाँगिए ।।

आगे मर्जी आपकी
जो उचित हो कीजिए ।
मगर अधिक भार लादकर
अपराध मत कीजिए ।।

लेखक एवं कवि –
जीतेन्द्र कानपुरी (टैटू वाले )

1 COMMENT

  1. बहुत बहुत आभार प्रकट करता हूं
    जय हिन्द

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