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🔰बस इतनी सी चाहत है 🔰

जिंदगी मेरे बस में हो
मै जैसे चाहूं , जियूं ।
दुनिया खिलौना हो
और मै उसका कारीगर बनूं ।।
बस इतनी सी चाहत है ……

मेरी डोर से सब जुड़े हो
सब मुझसे डरें ।
न काल न कपाल, न किसी
बैताल का कोई भय करे ।।

जब सबकी डोर पकड़ने वाला
मै ही सब कुछ हो जाऊं ।
तो जो भी गलत करे इस दुनिया में
उसकी ढपली रोज बजाऊं ।।
बस इतनी सी चाहत है ……

फिर तो किसानों की आत्महत्या
न होने दूं ।
फिर तो महिलाओं पर अत्याचार न होने दूं ।।
फिर तो भ्रटाचार न होने दूं ।
जीवन किसी गरीब का बेकार न होने दूं ।।
बस इतनी सी चाहत है ……..

📜लेखक कवि
जीतेन्द्र कानपुरी ( टैटू वाले)

1 COMMENT

  1. जी धन्यवाद आदरणीय श्री जी
    नमन वंदन

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