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🎴कहानी🎴

❇❇❇❇❇❇📝डॉ बल्लू का गुस्सा❇❇❇❇❇❇❇

बरसात के मौसम में मरीजों का आना जाना लगा हुआ था ।
डॉ बल्लू को मरीजों से इतनी भी फुर्सत नहीं मिल पा रही थी जिससे को एक पल सुकून की चाय भी आराम से बैठकर पी सके ।
थोड़ा सा भीड़ हटी तो डॉ बल्लू ने चाय की केतली गर्म करनी शुरू कर दी
केतली गर्म ही नहीं हो पाई , और पड़ोस के छिब्बन मियां पधार गए
मियां बोले – डॉ साहब क्या चाय भी आपको ही बनानी पड़ती है ।
डॉ साहब ने धीमे स्वर में कहा – मियां जी चुप बैठिए ये सब बातें बाद में पूछ लेना , मै बहुत थका हूं , एक तो अपने ही घर से और फिर गांव के इतने मरीजों से ।
मियां बोले – बा भई बा
मरीजों से थके हो , क्या पैसे नहीं लेते हो , फ़्री में इलाज के देते हो क्या ???
डॉ बल्लू ने फिर कहा – मियां जी आप चुप होते हो या नहीं ।
मुझे अपने काम से फुरसत नहीं , चले आते हैं फालतू की बकवास करने ।
ये अस्पताल है कोई गपसप घर नहीं है
आइंदा से आइएगा तो जुबान बन्द करके आइएगा ।
मुझे बेहूदा बात करने का समय नहीं ओर न ही मुझे ये सब पसंद है ।
मियां बोले – अरे अब चुप भी होगे या नहीं ?
अब टाइम खराब नहीं हो रहा क्या ?
लो एक और मरीज आ गया देख लो ।
डॉ बल्लू बोले – तुमने तो मेरी चाय भी पीनी हराम कर दी ।
अब तुम चले ही जाओ बस
मियां – अरे ठीक है , मै तो मजाक कर रिहा था ।
डॉ बल्लू साहब तुमने तो सीरियस ले लिया ।
चलो ठीक है चलता हूं जब आपका गुस्सा ठंडा होगा तभी आऊंगा ।
मियां जी अस्पताल से बाहर निकलते हुए घर तक बड़बड़ाते चले गए
मेरे पास में एक ही अस्पताल है
अगर दूसरा होता तो नहीं आता
चलो खैर बल्लू तुम आज गुस्से में हो , इसका कोई कारण होगा , हो सकता है घर में झगड़ा हो गया हो ।
ठीक है कोई बात नहीं , जब आदमी गुस्से में हो तो उससे ज्यादा जबान नहीं लड़ानी चाहिए । मुझे खेद है मुझे बहस नहीं करनी चाहिए थी , पर कमबख्त मेरी आदत ही ऐसी है क्या करूं ।
सलमा भी कहती है , जहां बैठ जाते बड़ बड़ करते रहते हो ।
या अल्लाह अब क्या सुध रुंगा मै
छप्पन बरस हो गए और कुछ दिन कि जिंदगी है , इसके बाद अल्ला ताला बुला ही लेगा ।
बड़बड़ाते बड़बड़ाते मिया जी घर पहुंचे ।
मियां जी को देखकर उनकी सलमा बेगम ने कहा क्योंकि बहुत जल्दी आ गए , आज रास्ते में कोई आपसे बातें करने वाला नहीं मिला क्या ??? वैसे तो कहीं भी जाते हो तो दो दो घंटे लगा देते हो , आज बस आधे घंटे के पहले ही आ गए ।
मियां जी – अरे बेगम आज तो बात ही बिगड़ गई डॉ बल्लू वैसे तो बहुत खुश मिजाज है लेकिन आज न जाने किस गुस्से में था , मै पहले की तरह बड़बड़ करने लगा तो वो आग बबूला हो गया ।
सलमा बेगम – तो क्या उसने आपकी नब्ज भी न देखी ???
मियां जी – नहीं आज तो उसने वापस ही कर दिया ।
सलमा बेगम – अरे ऐसा क्या जुल्म कर दिया आपने जो उसने आपको दवा भी नहीं दी । भला हो इसका सारी दुनिया को दवा देता है , हमसे कोन सी नफरत हो गई , अल्ला जानता है हम तो किसी का गलत भी न सोचे कभी ।
मियां जी – अरे ऐसी बात नहीं बेगम , वो थोड़ा गुस्से में है आज
एक दो दिन में जाऊंगा वो इतना बुरा भी नहीं है ।
मुझे ऐसा लगता है मै गलत समय पर उससे बात करने लगा ।तभी उसका खून और भी गरम ही गया ।
सलमा बेगम – आप भी तो पूरी जिंदगी अपनी आदत नहीं सुधार पाए ।
जब देखी बड़ बड़ – बड़ बड़ लगे रहते हो ।
अरे मजाक की कोई सीमा भी होती है ।
किसी सीरियस आदमी के साथ मजाक करोगे तो वो गुस्सा नहीं होगा तो क्या आपको शहद पिलाएगा ।
मियां जी – अरे बेगम अब तुम भी चालू हो गई बड़ बड़ – बड़ बड़ !
सलमा बेगम – लो जी चुप हो गई मगर अब आप भी जब बल्लू के यहां जाना तो थोड़ा कम ही बात करना , फिर वही बड़ बड़ मत करना
मियां जी – ठीक है मेरी बेगम जी
मान लिया तुम्हारा कहना , अब फालतू जुबान को बन्द ही रखूंगा ।
📓लेखक कवि कहानीकार📓
📌जीतेन्द्र कानपुरी (टैटू वाले)

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