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कुशल कारीगर होने के बावजूद रोजगार के अभाव में लोहरदगा जिला में तूरी परिवार के लोग 

सद्दाम अंसारी ब्यूरो प्रमुख(झा.फ्रं)

जिले के किस्को प्रखंड के पहाड़ी क्षेत्र के देवदरिया पंचायत के अंतर्गत के ग्राम खडिया गांव के 40 घरों के तूरी जाति परिवार के लोग पूंजी के अभाव में वर्षों से बेरोजगारी की जीवन जी रहे हैं ऐसे में तूरी जाति के लोग पूर्वजों के कलाकारी को धरोहर को परंपरागत रूप से कुशल कारीगर रोजगार का माध्यम बनाकर अपनाकर जीवन गुजर बसर कर रहे है.

तूरी जाति के लोग बांस का लकड़ी से टोकरी सूप डलिया सहित दर्जनों प्रकार के घरेलू उपकरण में काम आने वाले वस्तुएं बनाते हैं लेकिन बजार हाटो में ईन वस्तुओ को बिक्री के लिए ले जाते हैं तब मेहनत से पैसा बहुत काफी कम हो जाती है बांस का वस्तु सिर्फ 50 से 100 रूपया में सामग्रियों की बिक्री की जाती है जिसे तुरी परिवार के लोग चावल दाल सब्जी व अन्य खाने की सामग्री खरीद कर किसी तरह अपने बच्चों को पेट भर रहे हैं कुछ तूरी का कहना है की भर पेट खाना के लिये हमलोग तरसते है जिसके कारण आज भी खडिया के तुरी जाति के लोग बांस की लकड़ी से घरेलू उपयोग में आने वाले निर्माण करने वाले बहुत सारे लोग हैं लेकिन भी वन विभाग द्वारा लकड़ी की व्यवस्था नहीं की जाती है जिसे हम सभी तूरी जाती परिवार के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है कारीगर रितू तूरी सुगनी देवी जिरवा देवी है जो इस कारीगर को धंधे को पिछले 50 से 60 वर्षों से लगातार कर रहे हैं तूरी जाति के लोग बचपन की उम्र से इन कुशल कारीगरी को सीख कर बांस का लकड़ी से घरेलू सामग्री बनाने में जीवन बिता रहे है लेकिन इस कारीगरी से बहुत कम कमाई होने सेे न तो पर्याप्त पूंजी है और ना ही इस तूरी जाति को  सुविधा मिल रही है और ना ही जनप्रतिनिधियों की तरफ से कुछ सुविधा मिलती है.

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