ट्रांसफार्मर पर्सनालिटी ‘फादर ऑफ मार्डन मार्शल आर्ट्स लेफ्टिनेंट जनरल ग्रैंड मास्टर प्रो. डॉ जसबीर सिंह’

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ग्लोबल सेलेब्रिटी इंटरव्यू 
 

ट्रांसफार्मर पर्सनालिटी ‘फादर ऑफ मार्डन मार्शल आर्ट्स लेफ्टिनेंट जनरल ग्रैंड मास्टर प्रो. डॉ जसबीर सिंह’ – 

 
 
[मैं विश्व के हर बच्चे को आत्मसुरक्षित व आत्मनिर्भर बनाना चाहता हूँ। -लेफ्टिनेंट जनरल ग्रैंड मास्टर प्रो. डॉ . जसबीर सिंह]
हम सब जानते हैं कि मार्शल आर्ट्स का  मतलब युद्ध की कला से है और ये लड़ाई की कला से जुड़ा पंद्रहवीं शताब्दी का यूरोपीय शब्द है जिसे आज एतिहासिक यूरोपीय मार्शल आर्ट्स के रूप में जाना जाता है। मार्शल आर्ट्स के एक कलाकार को मार्शल कलाकार के रूप में संदर्भित किया जाता है पर यहां मैं एक भ्रांति को दूर कर दूं कि आज चीन में मार्शल आर्ट और कुंग फू जैसी विद्या ‘बोधीधर्मन’ नामक महान भारतीय की देन है। बोधिधर्मन् ( 520-526 ई) न सिर्फ मार्शल आर्ट बल्कि आयुर्वेद, सम्मोहन, और पंच तत्वों (भूमि,गगन,वायु,अग्नि,जल) को काबू में करने की विद्या बखूबी जानते थे और उन्होंने हमेशा अपने ज्ञान का प्रयोग लोककल्याण में किया। इसी बोधिधर्मन की परिपाटी को आगें बढ़ाने में एक बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न  भारतीय मूल के फादर ऑफ मार्डन मार्शल आर्ट्स कहे जाने वाले ग्रैंड मास्टर डॉ. जसबीर सिंह का जन्म हुआ। आज जसबीर सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। दुनिया उन्हें मार्शल आर्ट्स के पर्याय के रूप में सम्मान दे रही है। यह वह ट्रांसफर पर्सनालिटी हैं जिसमें उनके पिता स्व. सरदार सोहन सिंह जी के परलोकवासी होने के बाद आयी पारिवारिक जिम्मेदारी से उनके जीवन  में आये उतार – चढाव को कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया बल्कि हजारों लाखों लोगों की प्रेरणा बने। बता दें कि फिजिक्स कहती है कि जिस चीज को हजार बार चार्ज और डिस्चार्ज की प्रोसिस से गुजार दिया जाता है, दुनिया उसे ट्रांसफार्मर के नाम से जानती है। ग्रैैंडमास्टर डॉ जसबीर सिंह कहते हैं कि ठानना तो हमको ही पड़ेगाा कि  जिंदगी के उतार – चढाव को झेलकर हमें टूटना है या ट्रांसफार्मर बनकर हर घर को रोशनी से भर देना है।
 तो, आइये! आप सबको लेखनी की जरिये रूबरू कराते हैं विश्व प्रसिद्ध  शख्सियत प्रो. डॉ. ग्रैंड मास्टर डॉ. जसबीर सिंह की जुबानी –
सवाल-सर आपका पूरा नाम क्या है और आपका जन्मस्थान कहां हैं? वर्तमान में आपका कहां निवास स्थान कहां पर हैं? 
जवाब-मेरा पूरा नाम ग्रैंड मास्टर प्रो. डॉ. जसबीर सिंह है । मेरा जन्म भारत में पंजाब के ऐतिहासिक शहर  कपूरथला में हुआ था। वर्तमान में मैं कैलीफोर्निया यूू. एस. ए में बतौर अमेरिकन नागरिक निवास कर रहा हूं।
सवाल-आपने मार्शल आर्ट को ही अपने करियर के रूप में क्यों चुना?
जवाब-सच कहूँ तो मैंने कभी भी इसे अपने कैरियर के रूप में नहीं सोचा था पर अब मेरे लिए मार्शल आर्ट्स मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा है। आज मैं कह सकता हूं कि मार्शल आर्ट एक जीने की अद्भुत कला का नाम है। यह लोगों को सुरक्षा देने का एक सुअवसर की तरह है। जिसे मैं सर्वसुलभ करने को संकल्पित हूं।
सवाल-क्या आपने मार्शल आर्ट में कोई डिग्री या डिप्लोमा भी किया है?
जवाब- हाँ, मैंने मार्शल आर्ट में पी.एच.डी. की है।
सवाल- क्या आपको बचपन से लगन थी मार्शल आर्ट की? 
जवाब-हाँ, बचपन से जब मैं छोटा था तो ब्रूसली की फिल्मों मुझे मार्शल आर्ट्स की तरफ़ आकर्षित करती थीं और यही आकर्षण मेरा जुनून और मेरी लाईफ बन गया।
सवाल- ये ताईकवंडो और मार्शल आर्ट में क्या बड़ा अंतर है?
जवाब- ताइक्वांडो मार्शल आर्ट्स का ही पार्ट है। जो कि कोरिया में उत्पन्न हुआ। हालांकि इसको पौराणिक मार्शल आर्ट्स भी कहा जा सकता है। आज कल ताइक्वांडो एक ओलंपिक स्पोर्ट्स है। जिसमें मैं अभी वर्ल्ड ताइक्वांडो हैडक्वाटर्स कुक्कीवॉन कोरिया से सर्टिफाइड मास्टर हूं।
सवाल- आपका मार्शल आर्ट में व्हाइट बेल्ट से ब्लैक ब्लैक का सफर किन चुनौतियों से भरा रहा ? क्या इसमें घातक इंजरी (चोट) लगती 
है ?
जवाब – हमारे देश भारत में उन दिनों मार्शल आर्ट को इतनी प्राथमिकता नहीं मिलती थी और घर का कोई भी सदस्य मुझे मार्शल आर्ट सीखने नहीं देना चाहता था। उन्हें लगता था कि मैं मार्शल आर्ट्स सीख कर गुंडा बन जाऊंगा पर मेरी माँ ने मुझे समझा और पूरा सपोर्ट किया। मेरा मार्शल आर्ट्स सीखना मेरे जीवन का एक टर्निंग प्वाइंट  था। मैंने मेरे जीवन में पांच वर्ल्ड मार्शल आर्ट चैम्पियनशिप खेलीं हैं और जीतीं हैं जिनमें
1- वर्ल्ड मार्शल आर्ट एंड किक बॉक्सिंग चैम्पियनशिप 10-12 नवम्बर 2000 इटली में 5वें स्थान पर जीत।
2-वर्ल्ड ताइक्वांडो डू मूडो चैम्पियनशिप 18-19 नवम्बर 2000 पेरिस में तीसरा कांस्य पदक जीता।
3. 12वें इंटरनेशनल मुयेथाई और कराटे चैम्पियनशिप 20-22 फरवरी 2001 थाईलैंड में सिल्वर मैडल जीता।
4. 8वें अंतरराष्ट्रीय कराटे एंड किक बॉक्सिंग चैम्पियनशिप 23-25 मई नेपाल में तीसरा कांस्य पदक जीता।
5. एसोचायज़िओन सेंट्री स्पोर्टिवी अंतर्राष्ट्रीय चैम्पियनशिप 15 मई 2005 इटली में प्रथम स्वर्ण पदक जीता ।
6-5 डन ब्लैक बेल्ट वर्ल्ड ताइक्वांडो हैडक्वाटर कोकीवन सुयोल कोरिया, 7डन ब्लैक बेल्ट वर्ल्ड चंगडूक्वान फेडरेशन एस. कोरिया ।इसके अलावा में कई देशी-विदेशी जानी-मानी फेडरेशनों से 7डन ब्लैक बेल्ट्स और ग्रैंड मास्टर भी हूं।
   अंततः,  मैंने “अभ्यास! दृढ़ता! धैर्य! फिर पूर्णता इस मंत्र को अपने जीवन में उतारा और चलता गया, आगें बढ़ता गया। कहते हैं न ”नो पेन नो गेन” इंजरी तो कई बार हुई पर में जीतने के लिए बल्कि नहीं सीखने के लिए खेलता रहा और आज भी में सीखने के लिए ही खेलता हूं। सच बोलूं तो मैं अपने लाइफ का पहला स्टेट मैच हारा था और इसीलिए शायद में आज जीता हुआ एक सफल खिलाड़ी हूं।
सवाल – मार्शल आर्ट् में अगर आपको कुछ सुधारने और नया करने का मौका मिले तो आप क्या नया करना चाहेंगे ?
जवाब- मार्शल आर्ट्स कई प्रकार के हैं। आज कल मार्शल आर्ट्स के नियम और कानून कुछ कुछ अलग हो गए है जो कि में चाहता हूं कि मार्शल आर्ट्स को भी अकादमी शिक्षा से जोड़ा जाये जिसमें ग्रेजुएशन से लेकर डॉक्टरेट तक की डिग्री प्राप्त की जा सके तथा इसको वैश्विक स्तर पर शिक्षा आयोग अनुदान दे।जिससे मार्शल आर्ट का भी एकेडमिक ग्लोबलाइजेशन हो सके।
सवाल – हाल ही में आपकी आदमकद पेंटिंग के वीडियो वायरल हुए हैं इसपर कुछ बतायें? 
जवाब- हाँ, राजस्थान के वर्ल्ड रिकार्ड होल्डर आर्टिस्ट हीरालाल भदरेचा जी ने मेरी कई पेंटिंग और कलाकृतियां बनायीं हैं। इसके अलावा राजकोट व गुजरात में भी कई कलाकार मेरी पेंटिंग व आर्टवर्क में लगे हैं। बस सबके प्यार से मैं अभिभूत हूँ।
सवाल- खुद को एक लाइन में कैसे परिभाषित करेंगे? 
जवाब – ‘विनम्र बनो’ इस मंत्र को आधार बनाकर जिंदगी को  सीखते हुए वाहेगुरूजी की गुरूवाणी का अनुसरण करते हुये लोककल्याणकारी भावना से जो आगें बढ़ता चला जा रहा है वो जसबीर सिंह है ।
सवाल-आजकल इसे देश विदेश के स्कूलों में व कई सामाजिक संस्थाओं ने आत्मसुरक्षा हेतु प्रमुखता से जोड़ा हुआ है पर इसे सब्जेक्ट का दर्जा नहीं मिल सका तथा ओलम्पिक खेलों में भी इसे वो सम्मान प्राप्त नहीं। इस पर आप क्या कहना चाहेगें?
जवाब – सही मायने में कहा जाए तो इसमें भी एक पेजीदा पेच है। हम हर एक मार्शल आर्ट का एक ही एकेडमिक या फिर एक ही प्रोग्राम में एडजस्टमेंट नहीं करा सकेंगें। क्योंकि मार्शल आर्ट्स कई देशों में कई प्रकार के हैं और कई मार्शल आर्ट् के बारे अब तक पता भी नहीं लग पाया है परन्तु फिलहाल जूडो, ताइक्वांडो और शॉटोकन कराटे ओलंपिक गेम्स में शामिल हैं और कई एकेडमिक स्कूल में फिजिकल एजुकेशन में मार्शल आर्ट्स को प्रमुखता दी जा रही है। आने वाले दिनों में मार्शल आर्ट्स और उभरे ऐसी में कामना करता हूं।
 
सवाल- मार्शल आर्ट्स के क्षेत्र में आने वाले युवाओं को आप क्या संदेश देना चाहेगें ?
जवाब- मार्शल आर्ट्स एक तपस्या है एक जीने की कला है।जिसे समझने के लिए इसे जीना पड़ता है। फिर एक दिन हम इसमें खुद को स्वत: ही ढ़ाल लेते हैं। युवाओं को यही कहूंगा कि मार्शल आर्ट का कोई शॉर्टकट नहीं है। आप बस “वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो, हाथ में ध्वजा रहे, बल दल सजा रहे, तुम निडर डटे रहो। एक दिन विजयश्री स्वंय आपका विजय तिलक कर देगी।
सवाल- मार्शल आर्ट् में इतना ऊंचा मुकाम पाने के अलावा वर्तमान में आप विश्वहित में और क्या नया कर रहे है ? 
सवाल- मैं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एडवाइजरी बोर्ड का ऑफिशयल मेम्बर हूं। और मॉडर्न मार्शल का ग्लोबलाइजेशन करने लिये मेरी वर्ल्ड स्पोर्ट्स मार्शल आर्ट्स काउंसिल का प्रेसीडेंट एण्ड फाऊंडर हूं ।
वर्ल्ड एमेचर शुतोकॉन कराटे फेडरेशन  का प्रेसीडेंट एण्ड फाऊंडर हूं ।
जिसके द्वारा में कई देशों के अलग – अलग क्षेत्र में अपने सर्वोच्च योगदान द्वारा विश्व की प्रतिभाओं वैश्विक स्तर पर उभारने का प्रयास कर रहा हूं और इसके साथ ही में कई अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी में डीन और प्रेसिडेंट हूं।यूनाइटेड नेशन इंटर गवर्नमेंट आर्गनाइजेशन का प्रैसीडेंट मनोनीत हूं।
वर्तमान में यूनाइटेड नेशन जर्नलिस्ट इंटर गवर्नमेंटल आर्गनाइजेशन  का प्रैसीडेंट और फाउंडर हूँ व इंडियन रिपोर्टर्स एसोसिएशन (ईरा) का प्रधान संरक्षक (चीफ पेट्रोन) हूँ ।इसके जरिये हर स्तर के पत्रकारों को एक वर्ल्ड लेवल का प्लैटफार्म देना चाहता हूं और पत्रकारों से जुड़े मुद्दों को उनकी आवाज़ को यूनाइटेड नेशन्स तक पहुंचाना चाहता हूं । तथा यूनाइटेड नेशन वेल्फेयर ओर्गेनाजेशन का प्रधान संरक्षक हूँ इसके जरिये जरूरतमंदों की हर सम्भव  मदद करेगें। तथा ग्लोब ईगल यूनिवर्सिटी का प्रैसीडेंट और फाउंडर हूँ। इसके जरिये हम उच्चशिक्षा में जरूरतमंद बच्चों की मदद करेगें। यूनाइटेड नेेशन  बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में प्रैसीडेंट एंड फाऊंडर हूं। इसके जरिये गरीब जरूरतमंद देश विदेशी प्रतिभाओं को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लाईम लाईट में लाने का प्रयास करेगें। इसके अलावा कई अंतराष्ट्रीय एनजीओ और कई अंतर्राष्ट्रीय मिलिटरी और
इंटरनेशनल पुलिस फॉरम इंटर गवर्नमेंट आर्गनाइजेशन का जनरल सेक्रेटरी
(पीस पुलिस), सॉर्ड ऑफ फ्रीडम में कमांडर, यूएसए हूँ । इंटरनेशनल अकेडमी ऑफ कॉसेक, यूक्रेन में मेजर जनरल,सेक्रेटरी जनरल इंटरनेशनल ऐंटी टेरेरिस्ट एंड पीस फोर्स, इसके अलावा अनेक पुलिस संस्थानों से भी जुड़ा हुआ हूं। फेडरल पुलिस कैल्पिन इंटरनेशनल अंडर यूनाइटेड नेशन्स में लेफ्टिनेंट जनरल हूँ। इंटरनेशनल स्पेशल कोर्ट ऑफ  एर्बिट्रे़सन एंड ह्यूमन राईट का वाईस प्रैसीडेंट नार्थ अमेरिका एंड जज एर्बिट्रे़सन, इंटरनेशनल कमीशन ऑफ डिप्लोमैटिक रिलीजन ह्यूमन राईट्स एंड पीस अंडर सेक्रेटरी जनरल इंटेलीजेंस एंड वाईस प्रैसीडेंट नॉर्थ अमेरिका हूं। गवर्नमेंट इंटरनेशनल यूनाईटेड किंगडम एसोसिएशन कॉमनवेल्थ में मिनिस्टर ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स। मिनिस्टर स्पोर्ट्स एंड कल्चरल मार्शल आर्ट्स मिनिस्टरी इंटरनेशनल पार्लियामेंट यूएसए, सेनेटर मिनिस्टर ऑफ कल्चर एंड ह्यूमैनिटी इंटरनेशनल पार्लियामेंट यूएसए, मेरा मानना है कि संसार के हित के लिए जितना भी कर सकते हो वो खुशी से करना चाहिए।
सवाल-कृपया पीस पुलिस के बारे में बतायें? 
जवाब- पीस पुलिस का मतलब है वह पुलिस शांतिपूर्ण मानवता के कार्यों को सम्पन्न करती व करवाती है। जैसे कि किसी परिवार के बेटे या बेटी किसी भी सुरक्षा बल में है जो किसी कारणवश शहीद हो जाते हैं। उस समय उस परिवार को ऐसे कठिन समय में कई सरकारी कार्यों व विभिन्न स्तरों पर हम लोग उनकी जिस भी तरह सहायता कर सकते हैं वो हम करने को संकल्पित होते हैं।
 सवाल-आपकी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेगें ?
जवाब- मेरी सफलता के पीछे बहुत लोगों का सहयोग रहा है जिसमें मेरा बचपन का दोस्त रामलखन और मनोज कुमार सैनी और मेरे कोच सरदार अमनदीप सिंह पटियाल, कैनेडा, कोच अजीत कुमार, कैनेडा पर कहते हैं
ना कि हर कामयाब व्यक्ति के पीछे एक महिला का हाथ होता है और जो ‘मेरी माँ’ श्रीमती बलबीर कौर जी हैं। मेरा मानना है कि माँ से अधिक कोई और आपका सच्चा सलाहकार नहीं हो सकता।
सवाल- इस क्षेत्र में इतनी ऊंचाई हासिल करने के पीछे आपको क्या संघर्ष रहा ?
जवाब- कहते हैं जिस क्षेत्र में आपकी रुचि हो उस क्षेत्र में चलते हुए आपको जितना भी संघर्ष करना पड़े उसमें आनंद और आत्मसंतुष्टि निहित होती है और वो जीवन ही क्या जिसमें रोमांच न हो जिसमें उतार – चढ़ाव न हो। यही सब चीजें हमें जीना सिखाती हैं और जीवन पथ का सफल पथिक घोषित करतीं हैं। जिंदगी जीने के कई अंदाज़ होते है और मुझे मेरा यही अंदाज़ पसंद है।
सवाल- आप अब अमेरिका के निवासी हैं कभी भारत की याद आती है? 
जवाब – बिल्कुल, भारत  में मेरी जड़ें हैं और मैं मेरी जड़ों को कभी नहीं भूलता। श्वासों में बसता है भारत। जब याद आती है तो भारत आता हूं और सभी परिवारीजनों और दोस्तों से मिलता हूं।
सवाल – विश्व के युवाओं को आप क्या संदेश देगें ? 
जवाब- मेरे भारत के कई राज्यों में मार्शल आर्ट्स केन्द्र हैं पर मैं विश्व के हर कोने में मार्शल आर्ट्स केन्द्र खोलना चाहता हूं जिससे दुनिया का प्रत्येक बच्चा आत्मानुशासित, सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बन सके। इसके अलावा मैं विश्व के सभी युवाओं को यह कहना चाहता हूं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है युवाओं को समझना चाहिए कि वह सबसे पहले उच्चशिक्षित बने। और यह समझें कि प्रोग्रेस का मतलब सफलता नहीं होती वरन कई प्रोग्रेस लाईफ में आने पर एक महान सफलता को जन्म देती हैं, हमें धन के अलावा मानवता के कार्यों में भी स्वंय स्थापित करना चाहिये जिससे हम लोगों के दिलों में राज कर सकें।
कवरेज –  ब्लॉगर डॉ. आकांक्षा सक्सेना, एडीटर इन चीफ यूनाइटेड नेशन जर्नलिस्ट इंटर गवर्नमेंटल आर्गनाइजेशन, यूएसए.

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